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Hindi bedtime stories for kids
Browse gentle Hindi stories for kids, from animal tales and moral stories to bedtime favourites. Read them here, or choose a story in NinniTales and let your child listen with the screen off.
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कबूतर और बहेलिया
भूखे कबूतरों का एक झुंड चावल के दाने देखकर नीचे उतरता है और बहेलिये के जाल में फँस जाता है। सरदार सबको शांत रखता है और एक साथ पंख फड़फड़ाने की तरकीब बताता है। सब मिलकर जाल समेत उड़ जाते हैं, और चूहा मित्र जाल काटकर सबको आज़ाद कर देता है।

चींटी और कोयल
भीषण गर्मी में पानी की तलाश में निकली एक नन्ही चींटी नाले में गिर जाती है और डूबने लगती है, तभी पेड़ पर बैठी कोयल पत्ता गिराकर उसकी जान बचा लेती है। दोनों गहरे दोस्त बन जाते हैं, और एक दिन जब शिकारी कोयल को जाल में पकड़ लेता है, तो वही छोटी-सी चींटी उसके पैर पर काटकर अपनी दोस्त को छुड़ा लेती है। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि किया हुआ हर नेक काम कभी न कभी लौटकर जरूर आता है।

चींटी और टिड्डा
सर्दियाँ शुरू होते ही चींटियों की पूरी बस्ती अनाज जमा करने में जुट जाती है, और तभी ठंड और भूख से काँपता एक टिड्डा उनसे दो-तीन दाने माँगने आ पहुँचता है। चींटी उसे ताना नहीं मारती, बस इतना पूछती है कि पूरी गर्मियों में उसने अपने लिए कुछ क्यों नहीं जोड़ा। यह कोमल कहानी बच्चों को समय की कदर करना और भविष्य के लिए तैयार रहना सिखाती है।

चूहा और साधु
एक शांत मंदिर के पास रहने वाले साधु का सादा जीवन तब उलट-पुलट हो जाता है, जब एक नन्हा चूहा हर रात उनका भोजन चुराने लगता है। साधु खाना छिपाते हैं, ऊँची जगह पर लटकाते हैं, पर चूहा हर बार छलांग लगाकर वहाँ पहुँच ही जाता है। तभी एक विद्वान पंडित आते हैं और एक सीधा सवाल पूछते हैं: इस छोटे-से चूहे में इतनी ताकत आती कहाँ से है? दोनों धैर्य के साथ चूहे का पीछा करते हैं और उसके बिल में छिपा जमा किया हुआ भोजन खोज निकालते हैं। यही उसकी असली ताकत का राज़ था। यह कोमल कहानी बच्चों को सिखाती है कि किसी भी समस्या से घबराने के बजाय पहले उसकी जड़ समझनी चाहिए, क्योंकि सच्ची जीत ताकत से नहीं, समझदारी से मिलती है।

दुर्भाग्यशाली बुनकर
एक मेहनती बुनकर पाँच साल की कमाई जंगल में खो देता है, फिर भी हार नहीं मानता। रहस्यमयी आवाज़ों और दो व्यापारियों से मिलकर वह सीखता है कि धन का असली मोल उसे अच्छे कामों में लगाने और दूसरों के साथ बाँटने में है।

दो सिर वाली चिड़िया
एक जंगल में एक अनोखी चिड़िया रहती थी, जिसका शरीर एक था पर सिर दो थे। एक दिन पहले सिर ने स्वादिष्ट फल अकेले खा लिया और दूसरे सिर को नहीं दिया। दूसरे सिर ने गुस्से में बदला लेने के लिए जहरीला फल खा लिया, और नुकसान दोनों का हुआ। कहानी सिखाती है कि बाँटना और साथ चलना कितना ज़रूरी है।

बच्चे का नजरिया
एक बूढ़े पिता के काँपते हाथों से खाना गिरने और बर्तन टूटने लगते हैं, तो घरवाले उन्हें मेज से दूर बिठाकर लकड़ी की प्लेट और कटोरी में खाना देने लगते हैं। घर का चार साल का बच्चा यह सब चुपचाप देखता रहता है। एक शाम वह लकड़ी के टुकड़ों से जो बना रहा होता है, उसकी वजह सुनकर माता-पिता के चेहरे की मुस्कान गायब हो जाती है और उन्हें अपनी गलती का एहसास हो जाता है।

बिल्ली का पंजा
चार व्यापारी मिलकर रुई का व्यापार करते थे और चूहों से गोदाम बचाने के लिए उन्होंने एक फुर्तीली बिल्ली पाल ली। प्यार इतना बढ़ा कि हर व्यापारी ने बिल्ली के एक-एक पैर की जिम्मेदारी ले ली। फिर एक रात एक छोटी सी दुर्घटना हुई, पूरा गोदाम जलकर राख हो गया, और तीनों व्यापारी चौथे को दोषी ठहराने लगे। मर्यादा राम के दरबार में हुआ ऐसा फैसला, जिसने चारों को समझा दिया कि साझेदारी में सिर्फ़ लाभ नहीं, जिम्मेदारी भी बराबर बाँटनी पड़ती है।

बेईमान कर्ज़दार
एक किसान की फसल बर्बाद हो जाती है और वह एक दयालु साहूकार से सौ सोने के सिक्के उधार लेता है, बंधपत्र पर हस्ताक्षर करके। तीन महीने बाद जब लौटाने का समय आता है, तो वह चालाकी से बंधपत्र आग में जला देता है और अदालत में कहता है कि ऐसा कोई कागज़ कभी था ही नहीं। सबूत तो राख हो चुका है, फिर सच कैसे सामने आएगा? मर्यादा राम सिर्फ एक अनपेक्षित सवाल पूछते हैं, और किसान अपने ही झूठ में फंस जाता है। छोटे बच्चों के लिए ईमानदारी, बुद्धिमानी और न्याय की एक शांत, समझने में आसान कहानी।

बैल और लालची सियार
जंगल में दो सियार एक मोटे-ताज़े बैल को देखते हैं। एक सियार समझदारी की सलाह ठुकराकर लालच में बैल के पीछे लग जाता है। दिन, महीने और पंद्रह साल बीत जाते हैं, पर उसे कुछ नहीं मिलता। आखिर में वह समझता है कि जो पास है, उसकी कद्र करना ही असली समझदारी है।

ब्राह्मण का सोना
एक वृद्ध ब्राह्मण और उनकी पत्नी तीर्थ यात्रा पर जाने से पहले अपनी जीवनभर की कमाई, सोने के सिक्के, दाल से भरे पीतल के घड़े में छिपाकर पड़ोसी के पास रख जाते हैं। पड़ोसी को सच्चाई का पता चलता है और लालच उसे बेईमान बना देता है। लौटने पर ब्राह्मण को सिर्फ दाल मिलती है और पड़ोसी सब कुछ जानने से इनकार कर देता है। तब मर्यादा राम बाँस की एक खोखली देवी मूर्ति और एक होशियार बच्चे की मदद से ऐसी तरकीब रचते हैं कि सच खुद बाहर आ जाता है। सोना लौटाया जाता है और पूरा राज्य सीखता है कि भरोसा ही सबसे बड़ी दौलत है।

मरा हुआ हाथी और टूटे हुए घड़े
अपने बेटे की शादी के लिए एक व्यक्ति अपने मित्र से हाथी उधार लेता है, पर लौटते समय हाथी बीमार पड़कर मर जाता है। मालिक मुआवज़ा लेने से इनकार कर देता है और ज़िद पकड़ लेता है कि उसे वही हाथी जीवित वापस चाहिए। मामला मर्यादा राम के दरबार पहुँचता है, जहाँ वे समझाने के बजाय एक ऐसा उपाय करते हैं कि मिट्टी के पुराने घड़े टूटने पर ज़िद्दी मालिक खुद ही समझ जाता है कि जो टूट गया या खो गया, वह पहले जैसा नहीं हो सकता। अंत में दोनों मित्र एक-दूसरे को क्षमा कर शांति से घर लौटते हैं।

मुर्गी चुराने वाली लालची पड़ोसन
एक ईमानदार औरत की प्यारी मुर्गी दाना चुगते-चुगते पड़ोस के घर में चली जाती है, और लालची पड़ोसन उसे पकाकर खा जाती है। पूछने पर वह साफ़ मुकर जाती है और कहती है कि उसने मुर्गी देखी तक नहीं। सबूत न होने पर मुर्गी की मालकिन मर्यादा राम की अदालत पहुँचती है। मर्यादा राम एक छोटी-सी चतुर तरकीब से, बिना किसी गवाह के, झूठ को सबके सामने खोल देते हैं। 5 से 8 साल के बच्चों के लिए सोने से पहले सुनाने लायक एक मज़ेदार और समझदारी सिखाती कहानी।
मूर्ख ग्वालिन
एक ग्वालिन सिर पर दूध का मटका रखकर बाज़ार जाती है और रास्ते भर सोचती जाती है कि दूध के पैसों से वह चूजे खरीदेगी, फिर बकरियाँ, फिर गायें और एक दिन बहुत अमीर बन जाएगी। सपनों में खोई-खोई वह रास्ते का ध्यान भूल जाती है, उसका पैर एक पत्थर से टकराता है और मटका टूटकर सारा दूध ज़मीन पर बिखर जाता है। यह छोटी-सी पुरानी कहानी बच्चों को बहुत कोमल तरीके से समझाती है कि सपने देखना अच्छा है, पर उन्हें सच करने के लिए मेहनत और समझदारी भी ज़रूरी है।

मूर्ख दोस्त
राजा का सबसे प्यारा दोस्त एक बंदर था। एक दिन राजा की मदद करने के चक्कर में बंदर ने बिना सोचे ऐसा काम कर दिया, जिससे राजा को ही नुकसान हो गया। यह कहानी सिखाती है कि मदद करने से पहले सोचना भी ज़रूरी है। कहानी के अंत में एक दो सिर वाले पक्षी की नई कहानी भी शुरू होती है।

लोमड़ी और अंगूर
भीषण गर्मी में भोजन की तलाश में भटकती एक भूखी लोमड़ी को एक सुंदर बाग में ऊँची बेल पर लटके रसीले अंगूरों के गुच्छे दिखाई देते हैं। वह बार-बार दौड़कर छलांग लगाती है, गिरती है और फिर उठकर कोशिश करती है, लेकिन अंगूर बहुत ऊँचाई पर हैं। थक-हारकर लौटते हुए वह मुँह बनाकर कह देती है कि अंगूर तो खट्टे थे, और यहीं से बच्चों को अपनी असफलता स्वीकार करने की प्यारी सीख मिलती है।

लोमड़ी और सारस
एक चालाक लोमड़ी ने अपने दोस्त सारस को खाने पर बुलाया और शरारत से सूप एक सपाट प्लेट में परोस दिया, जिससे लंबी चोंच वाला सारस एक बूंद भी नहीं पी सका। अगले दिन सारस ने बिना गुस्सा किए लोमड़ी को अपने घर बुलाया और पतले मुँह वाले जग में सूप परोसा। भूखी बैठी लोमड़ी को उस दिन समझ आया कि दूसरों के साथ की गई चालाकी कभी-कभी लौटकर हमारे पास ही आती है।

व्यापारी और मूर्ख गधा
एक मेहनती गधा रोज़ व्यापारी के नमक के बोरे बाजार तक ढोता है। एक दिन वह नदी में फिसलकर गिर जाता है और नमक घुलने से उसका बोझ हल्का हो जाता है, तो वह यही चाल बार-बार दोहराने लगता है। व्यापारी उसकी चालाकी भाँप लेता है और अगले दिन नमक की जगह रूई के बोरे लाद देता है। पानी सोखकर भारी हुई रूई गधे को वह सबक सिखाती है, जो वह जीवन भर नहीं भूलता।

शेर और बैल
जंगल का राजा शेर और एक समझदार बैल गहरे दोस्त बन जाते हैं। लेकिन दो चालाक सियार इस दोस्ती से जलते हैं और दोनों के कानों में झूठी बातें भरकर शक का बीज बो देते हैं। बिना बात किए ही दोस्त एक-दूसरे से भिड़ जाते हैं, और बाद में शेर को पछताना पड़ता है। यह कहानी सिखाती है कि दूसरों की बातों में आने से पहले अपने दोस्त से सीधे बात करनी चाहिए।